रविवार, 29 मार्च 2026

माहेश्वर

 माहेश्वर 


        मैं परम ब्रह्म शाम सदाशिव या भगवान महेश से संबंधित या उनसे जुड़ा हुआ तथा प्रिय होने के कारण माहेश्वर हूँ।जन्म समय तथा जन्म स्थान के आधार पर ज्योतिष विद्या द्वारा बनायी गयी जन्मकुण्डली से प्राप्त नक्षत्र मघा के पहले चरण के अक्षर-मा से यह स्पष्ट होता है कि मैं भगवान महेश से जुड़ा हुआ माहेश्वर ही हूँ। इस प्रकार मेरा जन्म नाम माहेश्वर ही है तथा यही सनातन नाम भी है। इसे आध्यात्मिक नाम भी कह सकते हैं। मैं माहेश्वर देह नहीं हूँ।अजर-अमर आत्मा हूँ अर्थात् न तो मेरा जन्म होता है और नहीं मृत्यु। मैं जन्म और मृत्यु से परे हूँ।


           मुझे लोग संजय कुमार कुशवाहा कहते हैं, परंतु जब मेरा जन्म हुआ था. तब मेरा नाम संजय कुमार कुशवाहा नहीं था, फिर गर्भ में तथा उसके पहले यह नाम कैसे हो सकता है ? उस समय घर वाले इच्छा करते तो मेरा नाम संजय कुमार कुशवाहा नहीं रखकर कोई दूसरा नाम रख सकते थे, तब मैं उसी नाम से जाना जाता। इससे यह सिद्ध होता है कि मेरा नाम संजय कुमार कुशवाहा नहीं है।यह नाम तो मेरे भौतिक शरीर का है। मेरा नाम तो माहेश्वर ही है। 
           पूर्व संचित कर्मों के बंधन से मुक्त होकर ज्ञान प्राप्त करने के लिए तथा पवित्र उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मैं श्रीमान् मुखदेव प्रसाद तथा श्रीमती सवारी देवी के पुत्र के रूप में विक्रम संवत 2031 में बसंत ऋतु के फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष के परम पवित्र उदयातिथि एकादशी तथा अस्त तिथि द्वादशी दिन सोमवार के रात्रि पौने नौ बजे  के  को जन्म ग्रहण किया था। मेरा जन्म स्थान पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित शिवपुर के काजीपाड़ा मोड़ के पास सत्तहत्तर नंबर गुलाम हुसैन सरदार लेन में है। इस प्रकार परम पवित्र आमलकी या रंगभरी एकादशी तिथि 
तथा गोविंद द्वादशी तिथि को मुझे भौतिक शरीर प्राप्त हुआ था।
          मेरे माध्यमिक परीक्षा के अभिलेख के अनुसार मेरा जन्म दिनांक 1 मार्च 1978 है। उस समय जन्म का पंजीकरण नहीं होता था ,इसलिए अभिभावक लोग निजी स्वार्थ के चलते या जन्म तिथि को देखने के आलस्य के चलते या अज्ञानता वश अपने मन से ही कोई जन्मतिथि नामांकन के समय में विद्यालय में दर्ज करा देते थे,जो कि वास्तविक जन्मतिथि से भिन्न होता था।
           जन्म के समय मेरे पिताजी हावड़ा के शिवपुर के जूट मिल में किरानी के पद पर कार्य करते थे और माता वहीं पर गृहिणी के रुप में रहती थी। मेरा मूल निवास स्थान बिहार के सिवान जिले के भगवानपुर प्रखण्ड के कौडियाँ ग्राम में राजकीय मध्य विद्यालय कौडियाँ के पास है। मेरे पितामह श्रीमान् रामकृपाल महतो एक किसान और भक्त व्यक्ति थे।वे घुमघुमकर भक्तिगीत गाते थे तथा खेती का कार्य करते थे।मेरे प्रपितामह महंगु महतो भी एक किसान और भक्त व्यक्ति थे। उनका मूल निवास स्थान भगवानपुर प्रखण्ड के अरुवाँ नामक गांव में था। उनका विवाह हमारे वर्तमान मूल निवास स्थान कौडियाँ में हुआ था और वह यहीं आकर ससुराल में बस गए थे ।इसी प्रकार मेरे मातामह श्रीमान् शिव मंगल प्रसाद बहुत बड़े भक्त थे और वे संन्यास लेकर साधु का जीवन व्यतीत करते थे। उनका घर बिहार के गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर प्रखंड के महुआँ नामक ग्राम में था अभी भी उनके द्वारा बनाया गया बनवाया गया शिव मंदिर है।

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